हडप्पा सभ्यता- सिन्धु घाटी की सभ्यता

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सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीन (3300 ई0 पू0 से 1700 ई0 पू0) नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। सिन्धु घाटी सभ्यता का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक था।

  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई से इस सभ्यता के प्रमाण मिले हैं। अतः विद्वानों ने इसे सिन्धु घाटी की सभ्यता का नाम दिया, क्योंकि यह क्षेत्र सिन्धु और उसकी सहायक नदियों के क्षेत्र में आते हैं, पर बाद में रोपड़, लोथल, कालीबंगा, वनमाली, रंगापुर आदि क्षेत्रों में भी इस सभ्यता के अवशेष मिले जो सिन्धु और उसकी सहायक नदियों के क्षेत्र से बाहर थे।
  • इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ। मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे।
  • दिसम्बर 2014 में भिर्दाना को अबतक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया सिंधु घाटी सभ्यता का। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं।
  • यह सभ्यता सिन्धु नदी घाटी मे फैली हुई थी इसलिए इसका नाम सिन्धु घाटी सभ्यता रखा गया।
  • प्रथम बार नगरों के उदय के कारण इसे प्रथम नगरीकरण भी कहा जाता है प्रथम बार कांस्य के प्रयोग के कारण इसे कांस्य सभ्यता भी कहा जाता है।
  • सिन्धु घाटी सभ्यता के 1400 केन्द्रों को खोजा जा सका है जिसमें से 924 केन्द्र भारत में है।
  • 80 प्रतिशत स्थल सरस्वती नदी और उसकी सहायक नदियों के आस-पास है।
  • अभी तक कुल खोजों में से 3 प्रतिशत स्थलों का ही उत्खनन हो पाया है।
उत्खनन से सम्बंधित प्रमुख व्यक्ति
  • चार्ल्स मैसेन ने पहली बार इस पुरानी सभ्यता को खोजा।
  • कनिंघम ने 1882 में इस सभ्यता के बारे में सर्वेक्षण किया।
  • फ्लीट ने इस पुरानी सभ्यता के बारे मे एक लेख लिखा।
  • 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन किया। इसीलिए इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया।
  • भारतीय पुरातत्व विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल ने 1924 में सिन्धु सभ्यता के बारे में तीन महत्त्वपूर्ण ग्रथ लिखे।

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12 COMMENTS

  1. हमारे गांव गोगेलाव जिला नागौर राजस्‍थान में गांव के हिलोलाव तालाब के पास एक नीजि खेत में एक स्‍तम्‍भ खड्ा है जिसके चारों तरफ हिन्‍दू देवी देवताओं के चित्र उकेरे हुए है इस स्‍तम्‍भ के सामने के भाग में कुछ लिखा हुआ है उसमें सम्‍वत भी करीबन 1500 के लग भग का प्रतीत हो रहा है। जिसमें भगवान गजानन, राम, हनुमान, शिव के चित्र उकेरित है। स्‍तम्‍भ्‍ की मौटाई 1 से 1;50 फूट की है लम्‍बाई स्‍तम्‍भ की 9 से 11 फुट के लगभग है। स्‍तम्‍भ के शिखर पर एक अण्‍डाकार गुम्‍ब्‍ज भी था जो खेतों में काम करने वाले या रेवड् चराने वाले चरवाहों द्वारा हटा कर नीचे पटक दिया गया था जो इस स्‍तम्‍भ के पास है।

    • hamare ganv me or bhi kai satiyon ki murtiyen hen jo samavat 1200 se 1591 tak ki hei. inka itihas khojna hei. puratatva vibhag ko likha ja chuka hei.

  2. sir i have written about hadappa sabhayata in 2016 and i think that was started in 2600 – 1700 c.s
    and it was coverd india pakistan and some spaces of afganistan

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