(Ancient History Revision- Audio Notes in Hindi)

प्राचीन इतिहास रिवीजन भाग-2

  1. मौर्य साम्रज्य का शासनकाल 321 ई0 पू0 से 184 ई0 पू0 तक चला
  2. मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य था
  3. 322 ई0 पू0 में चन्द्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से नन्द वंश के अंतिम शासक धनानंन्द की हत्या करके मौर्य साम्राज्य की स्थापना की
  4. यूनानी साहित्य में चन्द्र्गुप्त मौर्य को सैंड्रोकोट्स कहा गया है
  5. 305 ई0 पू0 में चन्द्रगुप्त का संघर्ष सिकंदर के सेनापति सेल्युकस निकोटर से हुई जिसमें चंद्रगुप्त की विजय हुई
  6. चंद्रगुप्त के शासनकाल में मेगस्थनीज दरबार में आया और पाँच वर्षो तक पाटिलपुत्र रहा
  7. मेगस्थनीज ने इन्डिका की रचना की जिसमें मौर्य साम्राज्य की दशा का वर्णन है
  8. चंद्रगुप्त मौर्य ने सौराष्ट्र,मालवा,अवन्ति के साथ सुदूर साउथ भारत को मगध राज्य में मिलाया
  9. चंद्रगुप्त ने बाद में जैन धर्म स्वीकार किया व भद्रबाहु से जैन धर्म को स्वीकार किया
  10. चंद्रगुप्त मौर्य ने ई0 पू0 300 में अनशन व्रत करके कर्नाटक के श्रवणगोला में अपने शरीर का त्याग किया
  11. 300 ई0 पू0 में बिंदुसार मगध की गद्दी पर बैठा
  12. यूनानी इतिहासकारों ने बिंदुसार को अपनी रचनाओं में अमित्रोकेट्स की संज्ञा दी है जिसका अर्थ होता है शत्रु का विनाशक
  13. वायु पुराण में बिंदुसार को भद्रसार तथा जैन ग्रंथों में सिंहसेन कहा गया है
  14. बिंदुसार के शासन काल में तच्शिला में दो विद्रोह हुए पहले विद्रोह को उसके पुत्र सुसीम ने दबाया व दूसरे को अशोक ने दबाया
  15. बिंदुसार की मृत्यु 273 ई0 पू0 हुई
  16. बिंदुसार की मृत्यु के 4 वर्ष बाद ई0 पू0 269 में अशोक मगध की गद्दी पर बैठा
  17. सिंहसनारुढ होते समय अशोक ने ‘देवनामप्रिय’ तथा प्रियदर्शी’ जैसी उपाधि धारण की
  18. अशोक की माता का नाम सुभ्रद्रांगी था और वह चम्पा (अंग)की राजकुमारी थी
  19. अशोक ने कश्मीर तथा खेतान पर अधिकार किया कश्मीर में अशोक ने श्रीनगर की स्थापना की
  20. राज्यभिषेक के 8वें वर्ष 261ई0 पू0 में अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया
  21. कलिंग के हाथी गुम्फा अभिलेख से ज्ञात होता है कि उस समय कलिंग पर नंदराज नाम का कोई राजा राज्य कर रहा था
  22. कलिंग युध्द में व्यापक हिंसा के बाद अशोक ने बौध्द धर्म अपनाया
  23. अशोक ने बौध्द धर्म का प्रचार-प्रसार किया उसने अपने पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्रा को बौध्द धर्म के प्रचार के लिये श्रीलंका भेजा
  24. अशोक ने 10 वें वर्ष में बोधगया व 20 वें वर्ष में लुम्बिनी की यात्रा की
  25. अशोक ने ‘धम्म’ को नैतिकता से जोडा इसके प्रचार प्रसार के लिये उसने शिलालेखों को उत्कीर्ण कराया
  26. अशोक के शिलालेख ब्राही,ग्रीक,अरमाइक तथा खरोष्ठी लिपि में उत्कीर्ण है तथा स्तम्भ लेख प्राकृत भाषा में है
  27. सर्वप्रथम 1750 ई0 में टील पैंथर ने अशोक की लिपि का पता लगाया
  28. 1837 ई0 मे जेम्स प्रिंसेप ने अशोक के अभिलेखों को पढने में सफलता प्राप्त की
  29. अशोक के बाद कुणाल गद्दी पर बैठा वृहद्रथ अंतिम मौर्य शासक बना
  30. पुष्यमित्र शुंग ने वृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की नींव रखी
  31. पुष्यमित्र शुंग ब्राह्मण था व उस ने भागवत धर्म की स्थापना की
  32. पुष्यमित्र शुंग ने दो अश्वमेघ यज्ञ किये
  33. शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति था जिसकी हत्या 73 ई0 पू0 में उसके ब्राह्मण मंत्री वासुदेव ने की थी
  34. कण्व वंश की स्थापना वासुदेव ने 73 ई0 पू0 में की थी
  35. इस वंश का शासन मात्र 45 वर्ष रहा जिसमें 4 शसकों ने राज्य किया
  36. सातवाहन वंश की सिमुक ने की गौतमीपुत्र शतकर्णी इस वंश का शक्तिशाली शासक था
  37. गौतमीपुत्र शतकर्णी ने कार्ले का चैत्य मंदिर ,अजंता-एलोरा की गुफओं व अमरावती कला का विकास कराया
  38. सातवाहन वंश मातृसत्तामक था तथा उनकी भाषा प्राकृत व लिपि ब्राह्मी थी
  39. सातवाहन शासकों ने सीसा,चाँदी,ताँबा व पोटीन के सिक्के चलाये
  40. डेमेट्रियस-प्रथम ने ई0 पू0 183 में मौर्योत्तर काल में पहला यूनानी आक्रमण किया
  41. भारत में सोने के सिक्के जारी करने वाला पहला शासक वंश हिंद यूनानी था
  42. सबसे प्रसिध्द यवन शासक मिनांडर था जो बौध्द साहित्य में मिलिंद के नाम से प्रसिध्द है
  43. शक वंश का सबसे प्रतापी शासक रुद्रामन था
  44. विक्रमादित्य ने शकों पर जीत की स्मृति में 57 ई0 पू0 में विक्रम संवत चलाया
  45. गोन्दोफर्निस पल्लवों का पहला शासक था इसके शासन काल में सेंट थॉमस ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने भारत आया
  46. कुजुल कडफिसेस ने 15 ई0 में कुषाण वंश की स्थापना की उसका उत्तराधिकारी विम कडफिसेस था
  47. कुषाण वंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक कनिष्क था जो 78 ई0 मे गद्दी पर बैठा
  48. कनिष्क ने पुरुषपुर को अपनी राजधानी बनाया तथा राज्यारोहण के वर्ष से शक संवत प्रारम्भ किया
  49. चरक ‘चरक सहिंत’ के रचनाकार चरक को चिकित्साशस्त्र का जनक कहा जाता है इस ग्रंथ में रोग निवारण की औषिधियों का वर्णन मिलता है
  50. गुप्त वंश के शासन का प्रारम्भ श्रीगुप्त द्वारा किया गया किंतु इस वंश का वास्तविक शासक चंद्र्गुप्त ही था
  51. चंद्रगुप्त ने महाराजाधिराज की उपाधि ग्रहण की
  52. चंद्र्गुप्त के बाद उसका पुत्र समुद्रगुप्त शासक बना जो कि एक उच्च कोटि का कवि था
  53. चंद्र्गुप्त2 के शासन काल में चीनी यात्री फाह्रान भारत यात्रा पर आया
  54. कुमारगुप्त के शासन काल में नालान्दा विश्वविद्यालय की स्थापना हुई इसे ऑक्सफोर्ड ऑफ महायान कहा जाता है
  55. गुप्त युग में विभिन्न कलाओं मूर्तिकला, चित्रकला, वास्तुकला, संगीत, तथा नाट्य कला का अत्यधिक विकास हुआ

आगे और विस्तार से जानने के लिये AUDIO NOTES सुनें

AUDIO NOTES सुने





 यदि आपको हिंदी ऑडियो नोट्स पसंद आते हैं तो हमे subscribe कीजिये तथा हमारा फेसबुक पेज like कीजिये और यदि आपको कोई कमी लगती है तो भी हमें अपने कमेंट्स या सन्देश के माध्यम से अवगत कराएं  हम अपनी गुणवत्ता में लगातार सुधार कर रहे हैं परंतु आपके सुझाव आवश्यक हैं 


Post a Comment

  1. Sir ur doings very nice job
    It's hepfull to all
    Many many thanks

    ReplyDelete
  2. भारतीय इतिहास को जानने और समझने में तथा ज्ञानवर्धन में सहायक

    ReplyDelete
  3. Sir this is very nice work that u provide lots of things in hindi on same platform...

    God bless you....

    ReplyDelete
  4. ancient and midvile indian history auther and his books ke name ki list hindi me upload karo sir please

    ReplyDelete
  5. सच में ये काफी महत्वपूर्ण लेख है .. इससे पुरे भारत के निर्माण का पता चलता है. पर आजकल तो नेता लोग भारत को भूल ही गए है अपनी आपसी लड़ाइयों में सच में दुःख होता है .. धन्यवाद इस जानकारी के लिए ..

    ReplyDelete
  6. sir...
    so thanks
    I hope that time to time you published like this knowledge.
    I like and assume that all in mind.
    thankfully. ....

    ReplyDelete
  7. waiting continue to new knowledge
    towards you always?

    ReplyDelete

कमेंट करते समय कृपया अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें, ये ब्लाग ज्ञान वर्धन के लिये है अत: अनुरोध है कि शालीन भाषा का प्रयोग करें तथा हमें अपने विचारों से अवगत करायें