tripakshiy sangharsh

  • हर्ष की मृत्यु के पश्चात कन्नौज पर आधिपत्य करने के लिए बंगाल के पास  राष्ट्रकूट तथा उत्तर के गुर्जर प्रतिहारों के मध्य त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ
  • इस इस संघर्ष में भाग लेने वाले  पहले शासकों में वत्सराज जो की प्रतिहार वंश का था तथा ध्रुव राष्ट्रकूट वंश से तथा धर्मपाल पाल वंश से  थे 
  • यह संघर्ष  द्वारा बंगाल विजय  राष्ट्रकूट शासक से घिरने की घटनाओं के साथ आरम्भ हुआ 
  • प्रतिहारों की ओर से मिहिरभोज, राष्ट्रकूटों की ओर से कृष्णा तृतीय तथा पालों की ओर से नारायण पाल त्रिपक्षीय संघर्ष के अंतिम चरण में शामिल हुए 
  • प्रतिहार नरेश मिहिरभोज ने कृष्णा तृतीय एवं नारायण पाल को हरा कर कन्नौज पर अधिकार कर लिया तथा उसे अपनी राजधानी बनाया 

पाल वंश

  • पाल वंश की स्थापना  गोपाल द्वारा 750 ई में की गयी थी 
  • गोपाल का उत्तराधिकारी धर्मपाल हुआ जिसे  ध्रुव ने पराजित किया 
  • परन्तु  ध्रुव के लौटने पर धर्मपाल ने कन्नौज पर अधिकार कर लिया तथा पंजाब तथा राजस्थान को भी जीत लिया 
  • पाल शासक बौद्ध धर्म के संरक्षक थे 
  • ९ वीं   शताब्दी के मध्य में सुलेमान नामक एक अरबी यात्री ने  यात्रा की उसने पाल साम्राज्य को "रुह्मा " कहा है 
  • नालंदा विश्व विद्यालय को धर्मपाल ने ही पुनर्जीवित किया तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना भी की

गुर्जर प्रतिहार वंश 

  • इन्हें गुर्जर प्रतिहार  कहा जाता है क्यूंकि इनकी उत्पत्ति गुजरात या दक्षिण पूर्वी राजस्थान से हुई  
  • सिंध की ओर से राजस्थान पर होने वाले अरब शासको के आक्रमन को रोकने के की वजह से इन्हे ख्याति प्राप्त हुई 
  • 738 ई मे गुजरात के चालुक्यो द्वारा अरबो की पराजय हुई
  • प्रतिहार वंश और साम्राज्य का वास्तविक और सर्वश्रेष्ठ राजा भोज था 
  • प्रतिहारों  की राजधानी  कन्नौज थी
  • भोज पाल शासक धर्मपाल से पराजित हुआ
  • अरब यात्रियो के अनुसार प्रतिहार शासको के पास सर्वोत्तम अश्वरोहि सैनिक थे
  • भोज विश्णु का पुजारी था और आदिवराह की उपाधि उसने धारित की थी
  • महान कवि और नाटककार राजशेखर भोज के पोत्र महिपाल के दरबार मे रहता था
  • इस काल मे व्यापार वाणिज्य का ह्रास हुआ

आगे विभिन्न तथ्यो की जानकारी के लिये AUDIO NOTES सुने

त्रिपक्षीय संघर्ष हिंदी ऑडियो नोट्स 


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