हरीश, आयुष, सचिन और मोहित चारों आज शाम सब्जी लेने निकले हैं,  शनिवार का दिन है और प्रत्येक शनिवार को सब्जी मंडी लगती है और उसी दिन ये चारों पूरे हफ्ते की सब्जी ले आते हैं, आयुष तो ठहरा अंग्रेज उसे सब्जी मंडी जाना बिल्कुल पसंद नहीं हैं पर सब उसे जबरद्स्ती खींच कर ले जाते हैं और भाई सब्जी तो उसे भी खानी ही है
सचिन और हरीश के हाथ में एक एक थैला है, और मोहित और आयुष साहब बन कर चल रहे हैं
और ये सब्जी मन्डी आ पहुंचे
ए... घीया पच्चीस ..घीया पच्चीस.....घीया ....बढिया
ए....बैंगन कच्चे............................. लै लैओ अच्छे
     बैंगन कच्चे............................. लै लैओ अच्छे

"भैया मुझे मत लेकर आया करो कितना शोर करते हैं ये लोग" आयुष बोला
तभी जोर से आवाज आयी
अरे........ये किसका गिर गया, ...........ये किसका गिर गया
सभी लोग मुड कर उधर देखने लगे जहाँ से ये आवाज आयी थी
कुछ लोग उधर की ओर बढ गये................

वो फिर बोला ... गिर गया .........गिर गया
लौकी का भाव गिर गया .........लौकी का भाव गिर गया

आयुष अंग्रेज- मैं इसीलिये सब्जी मंडी नहीं आना चाहता कैसे लोग हैं यहाँ इण्डिया में, कान फोड़ दिये

हरीश हंसोड़- भाई जैसा भी है पर है तो अपना देश, वो गाना है ना अपने तो अपने होते हैं...हे ...हे...हे...हे

आयुष अंग्रेज - बकवास गाना , जब ऐसा गाना सुनाया करो तो साथ में हाजमोला भी दिया करो

हरीश हंसोड़ - हे....हे...हे...हे
चारों एक सब्जी वाले के पास जाकर रुक गये
आयुष अंग्रेज- सारी सब्जी 2-2 किलो देदो

सचिन सयाना - (दांत दिखाते हुए) भैया थोडा मेरा भी ख्याल कर लो उठानी तो मुझे ही है
आयुष को कददू पसंद नही, सचिन को भिंडी पसंद नहीं, मोहित को शिमला मिर्च पसंद नहीं, और हरीश को लौकी पसंद नहीं, अब सब्जी कैसे ली जाये
जैसे तैसे सभी लोग एक राय हुए और आखिरकार सब्जी खरीद पाये
5 किलो आलू, 2 किलो तोरईं , अरबी, टमाटर, और कुछ फली वाली सब्जीयाँ, और इसके बाद फल
कुल मिलाकर यही कोई 10-12 किलो वजन हो गया होगा
सारा वजन हरीश और सचिन बेचारे पर लटका दिया गया

और चल दिये घर की ओर
थोडा आगे चले ही हैं कि देखा कि एक बुजुर्ग वहाँ कुछ लोगों को रोक रोक कर कुछ कहना चाह रहा है
वह परेशान दिखाई पड रहा था , और कोई उसकी बात सुन नहीं रहा था

हरीश को उस पर तरस आ गया सारे लोग उस बुजुर्ग के पास गये और उससे पूछना चाहा कि आखिर बात क्या है क्यों वो इतना परेशान है

"बेटा मैं भटक गया हूँ  क्या तुम मुझे मेरे घर तक छोड दोगे" ये बोलते वक्त उस बुजुर्ग की आवाज कंपकपा रही थी, उसकी आवाज में थोडा डर दिखाई पड रहा था

मोहित मनगढंत- चिंता मत करो ताऊजी हम आपको घर छोड देंगे, बस ये बताओ जाना कहाँ है?

बुजुर्ग- बेटा मुझे गंगा अपार्टमेंट में जाना है, यहीं कहीं पास में ही है

मोहित मनगढंत- गंगा अपार्टमेंट ?? यहाँ किलोमीटरों तक ऐसा कोई अपार्टमेंट नहीं है मैंने पूरा इलाका घूमा हुआ है वो भी पैदल पैदल

सचिन सयाना- अरे कहीं ज्ञानगंगा अपार्टमेंट तो नहीं, वो तो यहाँ से 2 - 3 किमी0 दूर है, कहीं आपको वहां तो नहीं जाना??

बुजुर्ग- हाँ हाँ शायद वही, प्लीज मुझे वहाँ पहुंचा दो

आयुष अंग्रेज - अरे वो तो सब ठीक है हरीश भैया पर हम इन्हें छोडने कैसे जायेंगे, मेरा मतलब हमारे पास कोई वाहन तो है नहीं
हरीश हंसोड- हम जायेंगे बेरोजगार लोगों वाली ग्यारह नम्बर की गाडी से, यानी पैदल
आयुष अंग्रेज- मर गये :(

चलो ताऊजी, चलते हैं  हरीश बोला

चलते चलते 30-35 मिनट हो चुके हैं पर अभी ज्ञान गंगा अपार्टमेंट नहीं आया

आयुष अंग्रेज- सचिन के बच्चे , तू तो कह रहा था कि पास में ही है ,2- 3 किमी0 अभी तक तो कुछ आया नहीं

सचिन सयाना- भैया बस अगले मोड पर ही है ज्ञान गंगा अपार्टमेंट बस 5 मिंनट

और अगले मोड के बाद ज्ञान गंगा अपार्टमेंट आ गया
वो बुजुर्ग को वहाँ छोड्ने को हुए
तो बुजुर्ग बोला, एक मिनट रुको जरा पूछ्ने तो दो यही है कि नहीं
आयुष अंग्रेज- क्या ???? यही है कि नहीं मतलब???
बुजुर्ग- मतलब बेटा मुझे ठीक से याद नहीं कि मेरा अपार्ट्मेंट है कौन सा है
बुजुर्ग ने अपार्टमेंट में पूछा कि यहाँ आशीष मिश्रा रहते हैं क्या ??  "इस नाम का कोई व्यक्ति यहाँ नहीं रहता"
गेटकीपर ने जवाब दिया
अब चारों की हालत ये थी, कि ना निगलने के और ना उगलने के, थैला लेकर चलते चलते सचिन और हरीश की हालत खराब है
आयुष - मर गये, हरीश भैया तुम्हें ही तरस आया था, अब ये लो भुगतो
हरीश- भाई थोडी ठंड रख ये भी तो बेचारे परेशान हैं और हम इन्हें इस हालत में कैसे छोड सकते हैं
इधर बुजुर्ग बोला- मुझे लगता है वो जमुना अपार्टमेंट था

हरीश- ताऊजी पक्का ना??
बुजुर्ग- हाँ शायद

सचिन - ताऊजी शायद जमुना दास बिडला हाउसिंग सोसायटी की बात कर रहे हैं,वो यहाँ से लगभग 2 किमी0 है,  क्या वोही है ताऊजी??
बुजुर्ग- हाँ हाँ वोही है सही कहा
हरीश - चलो चलते हैं
सब लोग फिर से चल पडे

आयुष- भैया मुझे ना कुछ शक हो रहा है इन ताऊजी पर ये कभी गंगा कभी जमुना घुमा रहे हैं हमें, मुझे तो  कुछ गडबड लग रही है, कहीं ये हमें कोई उल्टी सीधी जगह जाकर ना फंसा दें

हरीश- तू भी ना आयुष ऐसी बातें करता है बिना सर पैर की, वो बेचारे बुजुर्ग से ठीक से बोला भी नहीं जा रहा और तू उन पर आरोप मढने मे लगा है, मुझे तो लगता है इन्हें भूलने की बीमारी है

मोहित- ऐसा कुछ भी नहीं होता ऐसी कोई बीमारी नहीं होती, मैंने तो आज तक ऐसी बीमारी के बारे में नहीं सुना,

हरीश- मोहित भैया आपने "अल्ज़ाइमर्स" के बारे में सुना है??  आपको पता है अल्जाइमर से दिमाग की कोशिकाएँ धीरे धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिसके कारण याददाश्त, सोचने की शक्ति पर गहरा प्रभाव पडता है
और जैसे जैसे उम्र बढती है ये रोग बढता जाता है, आम तौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक के लोगों को ये रोग अपनी चपेट में लेता है, तो हो सकता है ताऊजी को अल्जाइमर्स हो

आयुष- हाँ हो सकता है कि ये भूल गये हों पर अपार्टमेंट देख कर तो याद आ जाता, इतना भी नहीं भूल जाता कोई, ये उस अपार्टमेंट को देख कर भी तो कह सकते थे कि ये नहीं है

हरीश- आयुष तू सिर्फ अपार्टमेंट की कह रहा है, इस रोग में आदमी कुछ भी कर सकता है मसलन  अल्जाइमर का मरीज अपने पड़ोस में भी खो जाता है। वह यह भूल जाता है कि वह कहां है, वहां वह कैसे आया और घर वापस कैसे जाना है। वो अनाप-शनाप कपड़े पहन सकता है, गरमी में बहुत से कपड़े या ठंड में काफी कम कपड़े। उसके निर्णय लेने की क्षमता कम होती है। वह अंजान लोगों को बहुत सारे पैसे दे सकता है।

मोहित- तो  ताऊजी हमें पैसे देने ले जा रहे हैं क्या ??

हरीश- मोहित भैया तुम तो रहने दो , अभी ये सोचो इन्हें घर कैसे पहुंचाया जाये

तभी जमुना अपार्टमेंट भी आ गया, ताऊजी का फिर वही हाल "भाई साहब यहाँ आशीष मिश्रा रहते हैं क्या"
नहीं जवाब मिला

मर गये आज तो बन गयी सब्जी, हमारी खुद की आयुष बोला

भाई ठंड रख कुछ ना कुछ हल निकल आयेगा

बुजुर्ग- बेटा शायद वो सरस्वती अपार्टमेंट था,

सचिन- आपको कैसे पता सरस्वती थ??
बुजुर्ग- किसी नदी के ही नाम पर था, इतना याद है
हरीश- हा...हा...हा...हा...ताऊजी चलवा चलवा के मार दिया आपने अब बोल रहे हो नदी के नाम पर था
बुजुर्ग- नहीं बेटा इस बार पक्का यही होगा
सचिन - सरस्वती सी जी एच एस ना??
बुजुर्ग- हाँ बेटा बिल्कुल ठीक वही
मोहित- ये ठीक ठीक करके हमें मार डालेंगे


फिर भी मन मार कर चारों चल पडे
आयुष- इस बार ये भी ना हुआ तो इन्हें पुलिस स्टेशन छोड आयेंगे
हरीश- ठीक है, पुलिस इनका घर ढूंढ ही लेगी आखिर उनके पास गाडी होती है

वो सभी थोडा आगे चले ही थे कि पीछे से आवाज आयी
पिताजी.............पिताजी...............पिताजी
पीछे देखा तो एक युवक दौडा चला आ रहा था, वो जैसे ही पास आया बोला "कहाँ थे आप पिताजी मैंनें आपको कहाँ कहाँ नहीं ढूंढा"
हरीश- आपके पिताजी को भूलने की बीमारी है क्या?
युवक- हाँ इन्हें अल्जाइमर्स है, ये कुछ भी भूल जाते हैं, कभी कभी तो कपडों पर करने वाली प्रैस को फ्रिज में रख देते हैं, बेहद सामन्य चीजें भूल जाते हैं

मोहित- भाई आपको इनका इलाज कराना चाहिये अच्छे से

युवक- मैंनें हर जगह दिखाया है, कोई जगह कोई डाक्टर नहीं छोडा है पर इसका कोई इलाज नहीं है, हालंकि इस पर शोध चल रहा है, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने तो अल्जाइमर्स की एक दवा का अमेरिकन पेटेंट भी हासिल किया है

मोहित- पर ये होता कैसे है

युवक- आपको पता है दिमाग में एक सौ अरब कोशिकाएं (न्यूरान) होती हैं। हरेक कोशिका बहुत सारी अन्य कोशिकाओं से संवाद कर एक नेटवर्क बनाती हैं। इस नेटवर्क का काम विशेष होता है। कुछ सोचती हैं, सीखती हैं और याद रखती हैं। अन्य कोशिकाएं हमें देखने, सुनने, सूंघने आदि में मदद करती हैं। इसके अलावा अन्य कोशिकाएं हमारी मांसपेशियों को चलने का निर्देश देती है, और अल्जाइमर्स में इनको बुरी तरह क्षति पहुंचती है, और धीरे धीरे कोशिकायें मरने लगती हैं, और अल्जाइमर्स की आशंका रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाने से बढ़ जाती है,

हरीश- भाई बहुत काम की बात बताई आपने, वैसे ये तो बता दो आपका अपार्टमेंट है कौन सा??
युवक- नर्मदा अपार्टमेंट में रहता हूँ भाई मैं
आयुष- तो नर्मदा नदी थी 
मोहित- भाईयो चलो अब चलते हैं बहुत लेट हो गये हैं अब तो सचिन को ही खाना बनाना पडेगा, हम तो बहुत थक गये हैं
सचिन- हम नहीं भैया
युवक- आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने मेरे पिताजी के लिये इतना किया  

Tags: interesting general knowledge/science stories in Hindi, Alzheimers 

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  1. वाह मजा आ गया कहानी पढ़ के और अल्जाइमर के बारे में भी जान लिया

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