प्रिय मित्रो,
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सुबह सुबह का वक़्त है, हरीश की आंख बस खुली ही है कि अखबार वाले भैया की आवाज़ आती है " अखबार ले लो", अरे आ रहा हूँ ठहर जाओ हरीश ने जवाब दिया, आँखें मलते हुए हरीश दरवाजे की ओर हो चला और अखबार वाले से अखबार लेकर वापस मुडा ही था कि जोर जोर से हंसने लगा,
(अपनी आदत के अनुसार और शायद इसीलिये इसके दोस्तों ने इसका नाम "हरीश हंसोड" रख दिया है बात बात पर लोट पोट होकर हंसने वाला "हरीश हंसोड" आज कल दिल्ली में अपने कुछ दोस्तों के साथ रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है)


अंदर बैठे सभी दोस्तों के मन में कौतूहल उत्पन्न हुआ आखिर अब सुबह सुबह इसे किसने डस लिया 
"इब के हो गया तन्नै" अंदर से "मोहित मनगढंत" की आवाज आयी (मोहित की 50% बातें मनगढंत ही होती हैं इसलिये इसका नाम मोहित मनगढंत रख दिया दोस्तों ने),


हरीश हंसोड-  हा हा हा हा .................. कुछ नहीं, देखो अखबार की हेडलाइन क्या है "पिनाक-2 का सफल परिक्षण"
मोहित मनगढंत- तो इसमें के हंसने वाली बात हो गयी
हरीश हंसोड - अरे लग रहा है जैसे पिचकी नाक का परीक्षण किया हो, पि- नाक, पिचकी नाक वो भी दो दो ....हे हे हे हे
सचिन सयाना (चश्मे वाला)- अरे भैया वो एक रॉकेट है
(सचिन को हर चीज में अपना मतलब निकालना होता है  )
हरीश हंसोड- तो ले आते हैं चल दिवाली पर चलायेंगे बडा मज़ा आयेगा.... हा.. हा.. हा.. हा
सचिन सयाना (चश्मे वाला) - अरे भैया "पिनाक मार्क -2" भारत में निर्मित रॉकेट है जो भारतीय सुरक्षा प्रणाली का एक अंग बनने जा रहा है
हरीश हंसोड- तो इसका नाम ऐसा क्यू रखा ?? चल अब ये बता बहुत होशियार बन रहा है

सचिन सयाना- आपको पता है पिनाक भगवान शिव के धनुष का नाम था, जो भगवान परशुराम के पास था और उन्होने राजा जनक को सुरक्षित रखने को दिया था जब वो तपस्या करने के लिये गये थे और इसी धनुष के नाम पर इसका नाम रखा गया है

हरीश हंसोड- तुझे तो बहुत पता है चल अब और कुछ बता पिनाक रॉकेट के बारे में तुझे तो पता है मुझसे अखबार नहीं पढा जाता कितना बोरिंग होता है ना

सचिन सयाना- आपको पता है पिनाक -1 पहले से ही सेवा में है और पिनाक-2 को भी कभी भी सेना की सेवा में लिया जा सकता है, सबसे पहले पिनाक का परीक्षण 1995 में किया गया था, इसे मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर से दागा जाता है

हरीश हंसोड- अब ये मल्टी बैयरिंग लॉन्चर क्या चीज़ है तू ना हिंदी में बोला कर मुझे समझ नहीं आता
सचिन सयाना- अरे मेरे भैया ये बैयरींग नहीं ये बैरल है बहु बैरल रॉकेट लांचर (एमबीआरएल) का विकास तोपों के स्थान पर इस्तेमाल करने के लिए किया गया है । ये लो तुम फोटो देख लो तब समझ पाओगे
 
मोहित मनगढंत- अरे सचिन मैंनें पास से देखा है ये रॉकेट कंधे पर रखकर चला रहे थे और इसको 500 कि0 मी0 तक फेंक सकते हैं
हरीश हंसोड - क्या सच में ?? मुझे भी दिखा कर लाना 
सचिन सयाना- भैया ये सच नहीं है ये सिर्फ रॉकेट लांचर से दागी जा सकती है और इसकी मारक क्षमता 65 कि0 मी0 है जबकि मार्क -1 की मारक क्षमता 40 कि0 मी0 थी और अभी 120 कि0 मी0 तक के लिये इसका विकास किया जा रहा है
मोहित मनगढंत- इतनी दूर तो मैं हाथ से ही फेंक दूं
आयुष अंग्रेज- अजी हाँ, कई फेंक दिये तुमने, अब फेंकना बंद करो, चल ले सचिन आगे बता मैं भी सुन रहा हूं
(आयुष को अंग्रेजी और अंग्रेज कुछ ज्यादा ही पसंद हैं)
सचिन सयाना- आपको पता है एक ग्रुप में ऐसे 12 मल्टी बैरल लॉन्चर होते हैं जिनसे 44 सेकण्ड मे 72 रॉकेट दागे जा सकते हैं अभी हाल ही में इसका परीक्षण 30 मई 2015 शनिवार को पोखरण के पास सेना की चंदन फायरिंग रेंज़ से किया गया था, इसने 55 कि0 मी0 दूर कैरु क्षेत्र में निशाने को भेद दिया
मोहित मनगढंत - चल अब ज्यादा होशियार मत बन जा मैगी लेकर आ,  सुबह सुबह इनके प्रवचन और सुनो

बेचारा सचिन चल दिया मुँह लटका कर "ठीक है लाता हूं"

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