औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का पतन 


  • औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का पतन प्रारम्भ हो गया था औरंगजेब ने किसी को भी अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था
  • औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात उसके तीनों पुत्र मुअज्जम, आजम, कामबख्श में युध्द हो गया और अंत में उसका बडा पुत्र मुअज्जम जो कि उस वक्त 63 वर्ष का था वह विजयी हुआ उसने अपने दोनों भाईयों को मौत के घाट उतार दिया

औरंगजेब के पुत्र मुअज्जम ने किसकी उपाधि ग्रहण की

  • मुअज्जम ने लाहौर के समीप शाहदौला नामक पुल पर बहादुर शाह की उपाधि ग्रहण की और अपने आप को बादशाह घोषित किया
  •  इसे बहादुरशाह प्रथम या शाहआलम प्रथम के नाम से भी जाना जाता है

बहादुरशाह की संकीर्ण नीति का परित्याग 

  • इसने संकीर्ण धार्मिक नीति का परित्याग किया और शम्भा जी के पुत्र मराठा नेता शाहू को मुगल कैद से आजाद कर दिया 
  • इसने जजिया कर भी वापस ले लिया और मेवाड तथा मारवाड की स्वत्रंता को स्वीकार कर लिया
  • बहादुरशाह ने मराठा को सरदेश मुखी वसूलने का अधिकार तो दे दिया परंतु उन्हें चौथ वसूलने का अधिकार नही दिया 
  • बहादुरशाह ने शाहू को विधिवत मराठा के रूप में मान्यता प्रदान नहीं की  
  • इसने गुरू गोविंद सिंह को उच्च मंसब प्रदान किया लेकिन बंदा बहादुर को दबाया
  • बुंदेला सरदार छत्रसाल और जाट नेता चूडामल के साथ शांति स्थापित की

बहादुर शाह के दरबार में विकसित दल 

  • बहादुर शाह शिया मुस्लिम था उसके दरबार में दो दल विकसित हो गये थे एक ईरानी दल जिसमें असद खाँ व जुल्फिकार खाँ थे और दूसरा तूरानी दल जिसमें चिल्किच खाँ और गाजुद्दीन आदि थे

बहादुर शाह की मृत्यु 

  •  इसे ख्वाफी खाँ ने शाह-ए-बेखबर कहा है इसकी मृत्यु के बाद इसे एक माह तक दफनाया नहीं गया था 
  • ओवन सिडनी इसके बारे में कहते है कि ये अंतिम मुगल बादशाह था जिसके बारे में कुछ अच्छी बात कही जा सकती है

  • जहांदार शाह का शासन 

  • इसके बाद 1712 से 1713 तक जहांदार शाह का शासन हुआ 
  • इसके शासन काल से उत्तराधिकार के युध्द में शहजादों के अलावा मत्वपूर्ण मंत्री भी भाग लेने लगे थे जैसे जहांदार शाह के समय में जुल्फिकार खां ने उसका समर्थन किया था यह जुल्फिकार खां के समर्थन से ही राजा बना था

जहांदार शाह का व्यक्तित्व 

  •  जहांदार शाह बहुत ही दुर्बल व चरित्रहीन व्यक्ति था जिसके कारण इसके प्रशासन की सारी बागडोर उसके बजीर जुल्फिकार खाँ के हाथ में थी
  •  कहीं-कहीं वर्णन मिलता है कि जहांदार शाह ने जजिया कर को वापस ले लिया था

जहांदर शाह ने राजा जय सिंह को किसकी उपाधि दी

  • इसने अम्बर के राजा जय सिंह को मिर्जा राजा जबकि मारवाड के शासक अजीत सिंह को महाराजा की उपाधि दी

जहांदार शाह ने इनको चौथ वसूलने का अधिकार दिया

  • इसने मराठा सरदार शाहू को दक्कन में चौथ और सरदेश मुखी वसूल करने का अधिकार प्रदान किया
  • इसने जागीर और विभागा के बढती दरों में कमी की लेकिन इजरा पद्ति को बढावा दिया जिससे बिचौलियों में बृध्दि हो गई और कृषकों को भारी नुकसान उठाना पडा

लम्पट मूर्ख की उपाधि

  • 1713 में आगरा में फरुख्शियर ने इसे शिकस्त दी जहांदार शाह को लम्पट मूर्ख की उपाधि दी
फरुख्शियर का शासन काल

  • जहांदार शाह के बाद फरुख्शियर का शासन काल रहा इसका शासन 1713 से 1719 तक रहा

  •  1713 में जहांदार शाह व जुल्फीकार कार को मारने के पश्चात फरुख्शियर ने सम्राट की पद्वी धारण की
फरुख्शियर इन के सहयोग से शासक बना 

  • फरुखशियर अजीम-उस-शान का पुत्र था ते भी सैय्यद बंधुओं के सहयोग से शासक बना था जैसे कि जहांदार शाह जुल्फिकार खाँ के सहयोग से शासक बना था 

मुगल काल का किंग मेकर

  •  सैय्यद बंधु अब्दुल्ला व हुसैन अली को इस काल का किंग मेकर कहा जाता है
  •  सैय्यद बंधुओं में सैय्यद हुसैन अली पटना का उप गवर्नर था और सैय्यद अब्दुल्ला खाँ इलाहबाद का

फरुख्शियर के शासन काल में वजीर का पद

  •  फरुख्शियर के शासन काल में हुसैन अली खाँ मीर बक्शी तथा अब्दुला खाँ को वजीर का पद प्रदान किया गया था
बंदा बहादुर की मृत्यु 

  • 1715 मे फरुख्शियर ने बंदा बहादुर को मरवा डाला 

हुसैन अली व पेशवा बालाजी विश्ववनाथ की संधि 

  • 1719 में हुसैन अली ने पेशवा बालाजी विश्वनाथ के साथ एक संधि की इस संधि में दिल्ली सत्ता के संघर्ष में मराठों द्वारा सैनिक सहायता देने के आश्वासन देने पर उन्हें कई रियादतें दी गयी 
  • सैय्यद बंधुओं ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति का पालन किया और जजिया को पूर्णत: समाप्त कर दिया तथा अनेक स्थानो पर तीर्थ यात्रा कर को भी समाप्त कर दिया

ईस्ट इंडिया कम्पनी को व्यापारिक अधिकार
  •   1717 ई. में फरुख्शियर ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी को व्यापारिक अधिकार प्रदान किये इसके अंतर्गत तीन हजार वार्षिक कर के बदले बंगाल में व्यापार का अधिकार दे दिया

फरुख्शियर का विवाह

  •  राजपूर राजा अजीत सिंह की पुत्री का विवाह फरुख्शियर के साथ हुआ

रफी-उद-दरजात का शासन 

  • 1719 में सैय्यद बंधुओं ने मराठों की मदद से फरुख्शियर को मारकर रफी-उद-दरजात को गद्दी पर बैठाया
  • रफी-उद-दरजात को क्षय रोग होने के कारण यह चार महीने में ही मर गया

रफी-उद-दौला का शासन

  • इसके पश्चात रफी-उद-दौला शाहजहां के नाम द्वितीय के नाम से गद्दी पर बैठा किंतु अफीम का सेवन करने से इसकी भी जल्द ही मृत्यु हो गई

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