मुगलो का पतन भाग-2(Audio Notes)


  • मोहम्मद्शाह का शासन



रफी-उद-दौला जो शहजहाँ द्वतीय के नाम से गद्दी पर बैठा था उसकी मृत्यु के पश्चात मोहम्मद शाह 1719 से 1748 तक गद्दी पर बैठा

सैय्यद बंधुओं ने जहानशाह के 18 वर्षीय पुत्र रोशन अख्तर को मोहम्मद शाह की उपाधि प्रदान करके गद्दी पर बैठाया
कालांतर में उसकी विलासतापूर्ण प्रवृति के कारण उसे रंगीला की उपाधि भी मिली


  • मोहमदशाह के दल के नेता



मोहम्मद शाह के समय निजामुलमुल्क तथा मुहम्मद अमीन खाँ तुरानी दल के नेता थे

सैय्यद बंधुओं मे हुसैन अली को हैदर खाँ ने मार डाला तथा 1724 में अब्दुल्ला खाँ को विष पिलाकर मार डाला



  • हैदराबाद की नींव 




1722 में निजमुलमुल्क वजीर नियुक्त हुआ उसने प्रशासनिक सुधार लाने का प्रयत्न किया परंतु अन्त: सम्राट की संदेह्स्पद प्रवृत्ति के कारण वह दक्कन चला गया और दक्कन में स्वतंत्र हैदराबाद राज्य की नींव डाली

मोहम्मद शाह के शासन काल में सआदत खाँ ने अवध में तथा अलीवर्दी खाँ ने बंगाल में स्वतंत्र राज्य की नींव डाली

मोहम्मद शाह ही एक ऐसा शासक था जिसके काल में स्वतंत्र राज्यों की स्थापना शुरू हुयी थी



  • बाजीराव का दिल्ली पर आक्रमण 




मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम ने 1737 में कुल 500 घुडसवारों के साथ दिल्ली पर आक्रमण किया



  • कंधार पर हमला 




1739 में ईरान का नेपोलियन नाम से विख्यात नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण किया जब नादिरशाह ने कंधार पर हमला किया तो मोहम्मद शाह ने उसे विश्वास दिलाया कि भगौडो को काबुल मे शरण नहीं दी जायेगी

किंतु ऐसा नहीं हुआ जब नादिरशाह ने एक दूत भेजा तो दिल्ली में उसकी हत्या कर दी गई

नादिरशाह ने इसे भारत पर आक्रमण का प्रत्यक्ष कारण बना लिया



  • करनाल का युध्द 




24 फरवरी 1739 को करनाल में मोहम्मद शाह और नादिरशाह के मध्य युध्द हुआ

निजामुलमुल्क, कमरुद्दीन तथा सआदत खाँ मुगल सेना की तरफ से थे युध्द में कमुरुद्दीन मारा गया व सआदत खाँ बंदी बना लिया गया

युध्द मात्र तीन घंटे चला युध्द के पश्चात निजामुलमुल्क ने शांति दूत की भूमिका निभायी

दिल्ली मे कुछ मुगल सैनिको ने फारसी सैनिकों का वध कर डाला इससे क्रुध्द होकर नादिरशाह ने दिल्ली मे कत्लेआम करवाया



  • मयूर सिंहासन व कोहिनूर हीरा 




 नादिरशाह दिल्ली से मयूर सिंहासन व कोहिनूर हीरा भी लूट कर ले आया

कश्मीर और सिंधु नदी के पश्चिमी प्रदेश पर भी नादिर शाह का अधिकार हो गया



  • अहमद शाह का शासन काल 




 नादिरशाह के बाद अहमदशाह गद्दी पर बैठा इसका शासनकाल 1748 से 1754 तक रहा

अहमदशाह मोहम्मद शाह का पुत्र था इसकी उधमबाई माता एक नृत्यांगना थी

अहमदशाह के शासनकाल में उधमबाई और उसके प्रेमी जावेद खाँ के हाथों में शासन की बागडोर थी



  • अहमद शाह दुर्रानी का आक्रमण 




 इसके शासनकाल मे 1748, 1749 में अफगान शासक अहमदशाह दुर्रानी ने आक्रमण किया और उससे सम्पूर्ण देश का अधिकार पत्र लिखवा लिया यह बहुत विलासी व्यक्ति था उसने अपने ढाई वर्ष के पुत्र महमूद को पंजाब का गवर्नर, एक वर्ष के बच्चे को कश्मीर का गवर्नर तथा 15 वर्ष के बच्चे को उसका द्युक्ति नियुक्त कर दिया



  • अहमद शाह के शासन काल का वजीर




 इसके समय कालांतर में गाजीरुद्दीन वजीर बना उसके बाद इमाद-उल-मुल्क वजीर बना



  • आलमगीर द्वितीय का शासन 




इसके बाद अगला शासक आलमगीर द्वितीय बना इसका शासन काल 1754 से 1758 तक रहा

मुगल वजीर इमाल-उल-मुल्क ने मुगल सम्राट अहमदशाह को अंधा करके उसके बाद आलमगीर द्वितीय को सिंहासन पर बैठाया

आलमगीर द्वितीय जहादारशाह का पुत्र था जब वह अपने वजीर के चुंगल से मुक्ति पाने का प्रयास कर रहा था उस समय इसे मार डाला गया


  • शाहआलम द्वितीय का शासन 




आलमगीर द्वितीय के बाद शाहाआलम द्वितीय शासक बना इसका शासन काल 1759 से 1806 तक चला

 इसका वास्तविक नाम अली गौहर था शासक बनने के बाद यह 12 वर्ष तक दिल्ली नही गया



  • बक्सर युध्द 




 इसने 1764 में बंगाल के मीर कासिम और अवध के शुजाउद्दौला के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुध्द बक्सर का युध्द किया किन्तु हार जाने के बाद यह कई वर्षो तक इलाहबाद में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के संरक्षण में रहा

1772 में यह मराठों की सहायता से दिल्ली पहुंचा 1765 में इसने बिहार, बंगाल और उडीसा की दीवानी ईस्ट इण्डिया कम्पनी को दे दी और कम्पनी ने उसे 26 लाख रु. की वार्षिक राशि देने का वचन दिया

रोहिल्ला सरदार गुलाम कादिर ने इसे अंधा कर दिया और उसे गद्दी से हटा कर विदारत को गद्दी पर बैठाया परन्तु मराठों ने उसे पुन: गद्दि पर बैठा दिया

1803 में अंग्रेजों ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया उसके बाद 1806 तक यह अंग्रेजों की पेंशन पर जीवित रहा



  • अकबर द्वितीय का शासन 




 इसके बाद अकबर द्वितीय ने 1806 से 1837 तक शासन किया इसने अपने पेंशन के सिलसिले में ‘राममोहन राय’ को ‘राजा’ की उपाधि देकर इंग्लैड भेजा



  • बहादुरशाह का शासन 



अकबर द्वितीय के बाद बहादुर शाह ने शासन किया शायर होने की वजह से इसे ‘बहादुर शाह जफर’ भी कहा गया

1857 के विद्रोह में भाग लेने के कारण इन्हें बंदी बना कर रंगून के लिए निर्वाचित कर दिया गया था

1862 में इनकी मृत्यु होने पर मुगल वंश का अंत हो गया

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