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ब्रिटिश शासन में सांविधानिक विकास- Indian Polity Audio Notes in Hindi- Part-1

भारतीय राज्यव्यवस्था (Indian Polity) का प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे SSC, UPSC, UPPSC आदि में विशेष महत्व है,और सदैव ही इस भाग से सवाल पूछे जाते हैं, सामान्य अध्ध्ययन का ये भाग वैसे बेहद ही आसान है यदि एक बार इसे ठीक से समझ लिया जाये, सामान्य ज्ञान के Audio Notes की शृंखला में अब प्रस्तुत हैं Indian Polity Audio Notes in Hindi
ब्रिटिश शासन में सांविधानिक विकास 
  • भारत में संविधान का विकास 1857 तक ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधीन और उसके पश्चात ब्रिटिश क्राउन के अधीन हुआ
  • ईस्ट इंडिया कम्पनी का संचालन दो समितियों द्वारा किया जाता था, “स्वामी मण्डल और संचालक मण्डल”
  • स्वामी मण्डल(Court of Proprietors)- कम्पनी के सभी साझीदार इसके सदस्य होते थे, जिन्हें सभी नियम कानून और अध्यादेश बनाने का अधिकार था, और इन्हें ये भी अधिकार था कि यदि कोई नियम संचालक मण्डल बना रहा है तो ये उसे रद्द भी कर सकते थे
  • संचालक मण्डल(Court of Directors)-  संचालक मण्डल में 24 सदस्य होते थे जो स्वामी मण्डल से ही होते थे और स्वामी मण्डल द्वारा ही चुने भी जाते थे, संचालक मण्डल का कार्य स्वामी मण्डल द्वारा बनाये गये नियमों का पालन करवाना था
  • भारतीय संविधान का ढांचा विकसित होने में मूल रूप से 1857 ई0 के बाद ब्रिटिश क्राउन द्वारा किये गये संवैधानिक परिवर्तन महत्वपूर्ण हैं
रेग्युलेटिंग एक्ट (Regulation Act)1773
  • मद्रास और बम्बई प्रेसिडेंसियों को बंगाल प्रेसिडेंसी के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया
  • कलकत्ता के फोर्ट विलियम में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गयी जिसका अधिकार क्षेत्र बंगाल, बिहार तथा उडीसा तक था
  • इस नियम का मूल उद्देश्य कम्पनी की गतिविधियों को ब्रिटिश क्राउन की निगरानी में लाना था
पिट्स इंडिया एक्ट (Pits India Act)1784
  • एक नियंत्रण मंडल (Board of Control)की स्थापना की गयी
  • संचालक मंडल, नियंत्रण मंडल की सभी आज्ञाएं मानने के लिये बाध्य था
  • और स्वामी मण्डल के संचालक मण्डल के फैसले उलटने के अधिकार को खत्म कर दिया गया
चार्टर अधिनियम (Charter Act)1793
  • नियंत्रण मण्डल के सदस्यों और स्टाफ को भारतीय राजस्व से वेतन देना प्रारम्भ किया गया, जो 1919 तक जारी रहा
चार्टर अधिनियम(Charter Act) 1813
  • इस चार्टर से कम्पनी के अधिकार पत्र को 20 वर्ष के लिये बढा दिया गया
  • कम्पनी के व्यापारिक एकाधिकार(Monopoly) को समाप्त कर दिया गया
  • हालांकि चाय, चीनी और सिल्क के व्यापार पर कम्पनी का एकाधिकार बना रहा
चार्टर अधिनियम (Charter Act)1833
  • अब ईस्ट इंडिया कम्पनी के सभी व्यापारिक अधिकार समाप्त कर दिये गये और अब वह भारत में सिर्फ प्रशासन के प्रति उत्तरदायी रह गयी थी
  • अब यूरोपीय लोग भारत में सम्पत्ति अर्जित कर सकते थे, क्योंकि उस पर लगी रोक हटा ली गयी थी
  • बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया
  • भारतीय विधि आयोग की स्थापना की गयी
  • विधि आयोग ने कई रिपोर्ट पेश की जिनमें से मैकाले का पेनल कोड बहुत प्रसिद्ध है
  • मद्रास तथा बम्बई में गवर्नरों की कानून बनाने की शक्ति को घटा दिया गया और उनके द्वारा किसी कानून को रद्द करने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया
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