विकिरण क्या होता है ?

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ताप ऊर्जा के किसी रिक्त स्थान में संचार को विकिरण कहते है। परम शून्य के ऊपर के तापमान वाली सभी वस्तुएं उनकी प्रवाहकता गुणा यदि वे कोई काले रंग की वस्तु हों तो उनमें से ऊर्जा के विकिरित होने की दर के बराबर ऊर्जा का विकिरण करती हैं। विकिरण के लिये किसी माध्यम की जरूरत नहीं है क्यौंकि इसका संचार विद्युतचुम्बकीय तरंगों द्वारा होता है; विकिरण पूर्ण निर्वात में भी कार्य करता है। सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी को गर्म करने के पहले अंतरिक्ष के निर्वात में से गुजरती है।

  • सभी पिंडों की परावर्तकता और प्रवाहकता दोनो ही तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करती हैं। प्लैंक्स लॉ ऑफ ब्लैक-बॉडी रेडियेशन के अनुसार तापमान तीव्रता की सीमा तक विद्युतचुम्बकीय विकिरण के तरंगदैर्ध्य के वितरण को निश्चित करता है।
  • किसी भी पिंड के लिये परावर्तकता भीतर आ रहे विद्युतचुम्बकीय विकिरण के तरंगदैर्ध्य के वितरण और इसलिये विकिरण के स्रोत के तापमान पर निर्भर करती है।
  • प्रवाहकता तरंगदैर्ध्य के वितरण पर और इसलिये पिंड के तापमान पर निर्भर करती है। उदा.ताज़ी बर्फ जो दिखाई देन् वाले प्रकाश के लिये उच्च परावर्ती होती है (लगभग 0.90 परावर्तकता), करीब 0.5 माइक्रोमीटर के शीर्ष ऊर्जा तरंगदैर्ध्य वाले सूर्यप्रकाश को परावर्तित करने के कारण सफेद दिखती है। परंतु करीब -5 °C तापमान और 12 माइक्रोमीटर के शीर्ष ऊर्जा तरंगदैर्ध्य पर उसकी प्रवाहकता 0.99 होती है।

गैसें तरंगदैर्ध्य के विशिष्ट प्रतिमानों में, जो हर गैस के लिये भिन्न होते हैं, ऊर्जा का अवशोषण और उत्सर्जन करती हैं।

  • दिखने वाला प्रकाश विद्युतचुम्बकीय विकिरण का एक और प्रकार है जो इन्फ्रारेड विकिरण की अपेक्षा कम तरंगदैर्ध्य (और इसलिये अधिक आवृति) वाला होता है। दिखने वाले प्रकाश और परम्परागत तापमानों की वस्तुओं से होने वाले विकिरण में आवृति और तरंगदैर्ध्य में करीब 20 के गुणक की भिन्नता होती है; दोनो प्रकार के उत्सर्जन केवल विद्युतचुम्बकीय विकिरण के विभिन्न “रंग” होते है।

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